ऋतुसंधि के दिनों में आहार–विहार: शरीर को बदलाव के लिए तैयार करें आयुर्वेद में ऋतुसंधि का अर्थ है—दो ऋतुओं के बीच का संक्रमण काल। इस समय मौसम, तापमान, आर्द्रता और दिनचर्या में बदलाव शरीर की अनुकूलन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस अवधि में अचानक आहार-विहार बदलने के बजाय धीरे-धीरे अनुकूलन करना उचित माना गया है। आहार कैसा रखें? भोजन हल्का, सुपाच्य और ताजा रखें। बहुत अधिक तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार और भारी भोजन कम करें। भूख के अनुसार भोजन करें; बिना भूख के बार-बार खाने से बचें। पर्याप्त मात्रा में गुनगुना या सामान्य तापमान का पानी लें। मौसमी फल, सब्जियाँ और संतुलित घर का भोजन प्राथमिकता दें। एक ऋतु के विशेष आहार को दूसरी ऋतु में अचानक बहुत अधिक मात्रा में शुरू न करें। विहार में क्या ध्यान रखें? सोने और जागने का समय नियमित रखें। मौसम के अनुसार व्यायाम की तीव्रता धीरे-धीरे बदलें। अत्यधिक देर रात जागना और दिनचर्या में अचानक बड़े बदलाव से बचें। शरीर को मौसम के अनुरूप कपड़े पहनाएँ—न बहुत गर्म, न अनावश्यक रूप से हल्के। पर्याप्त नींद, स्वच्छता और मानसिक विश्राम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
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